~तुलसी:tulsi:-
तुलसी(tulsi) का पौधा परम पवित्र है। सहस्रों वर्षोंसे हिन्दू तुलसीकी उपासना करते आ रहे हैं। तुलसीको हम मन्दिरोंके सम्मुख तो लगाते ही हैं, घरोंमें भी तुलसीका रोपण कर अपनेको धन्य समझते हैं। तुलसीमें सभी देवोंका निवास है। तुलसीसे जल पवित्र हो जाता है। तुलसीको गन्ध विकारनाशक है।
तुलसी (tulsi) का औषधीय महत्त्व भी है। यह रुचिमें कड़वी होती है तथा उष्ण गुणवाली होती है। इसका सेवन करनेसे छर्दि, शोथ, कृमि आदि नष्ट होते हैं। आयुर्वेदके अनुसार यह हृदय रोगोंके लिये हितकारिणी है तथा खाँसी, विष-विकार एवं पसलीकी पीड़ाको दूर करती है। यह दूषित कफका नाश करती है, पित्तकी वृद्धिको रोकती है तथा कुपित वायुका शमन करती है।

यहाँ तुलसीके कई औषधीय उपयोग दिये जा रहे हैं। चिकित्सकोंसे परामर्श लेकर उनसे लाभउठाया जा सकता है-
(1) गुर्देकी पथरी-
तुलसीदलके रसमें मधु मिलाकर सेवन करे।
(2) गीली खाँसी, सूखी खाँसी तथा दमा-
तुलसीके पत्तेके रसमें मधु और अदरकका रस मिलाकर सेवन करे।
(3) हिचकी-
छोटी इलायचीके दानोंको तुलसीके पत्तेके रसमें पीसकर चाटे।
(4) रतौंधी –
श्यामा तुलसीका रस दो-तीन बूँद चौदह दिनोंतक आँखमें डाले।
(5) ज्वर-
तुलसीकी पत्ती एक तोला तथा काली मिर्च दस-बारह दाने पीसकर मटरके बराबर गोली बनाये, छायामें सुखाकर दो-दो गोली, तीन-तीन घंटेपर जलके साथ सेवन करे।
(6) उल्टी-
तुलसीके पत्तेका रस मधुमें मिलाकर चाटे।
(7) अजीर्ण-
तुलसीकी सूखी पत्तियों तथा काली मिर्चके चूर्णका सेवन करे।
(8) मन्दाग्रि –
तुलसीका पञ्चाङ्ग (सूखा) तथा काली मिर्च दोनोंके चूर्णका सेवन करे।
(9) हैजेकी सामान्य दशा-
तुलसी(tulsi) की पत्ती और काली मिर्च पीसकर सेवन करे।
(10) सिरदर्द–
तुलसीके बीजोंके चूर्णका मधुके साथ सेवन करे।
(11) बच्चोंके यकृत्की गड़बड़ी-
तुलसी(tulsi )पत्र-रसका सेवन कराये।
(12) छोटा घाव –
तुलसी(tulsi)के बीजोंको पीसकर लगाये।
(13) दाँत-दर्द-
तुलसीपत्र-रस तथा कपूरको रूईके फाहेसे लगाये।
(14) सूजन-
तुलसी (tulsi) पत्र-रस लगाये।
(15) बच्चोंका पेट दर्द-
तुलसीके पत्तों एवं अदरकके रसका सेवन कराये।
(16) बच्चोंका कान-दर्द-
तुलसीपत्र-रस(गुनगुना) कान मे डाले|
(17) बच्चोंका पेट फूलना-
तुलसी (tulsi) दल और पानके पत्तेका रस (गुनगुना) पिलाये। इससे पेट साफ होता है और अफारामें बहुत लाभ होता है।
(18) बच्चोंका दाँत निकलना –
तुलसीके पत्तोंका रस मधुमें मिलाकर मसूढ़ोंपर मले तथा थोड़ा चटाये। इससे दाँत आसानीसे निकलते हैं।
(19) लू लगनेकी दवा-
तुलसीके पत्तोंका रस चीनी मिलाकर पीये।
(20) अनावश्यक रज-स्राव-
तुलसीकी जड़का चूर्ण पानमें रखकर खिलानेसे लाभ होता है।
(21) चक्कर आना-
तुलसीके पत्तोंके रसमें चीनी मिलाकर चाटे।
(22) प्रसव पीड़ा-
तुलसीके पत्तोंका रस पिलाये।
(23) मूत्रदाह-
मूत्रदाहमें तुलसीदल चबाये।
(24) मुखके छाले-
तुलसीदल और चमेलीकी पत्तियाँ चबाये।
(25) प्रदर-
तुलसीपत्र-रस दो तोला चावलके माँड़में मिलाकर पीये। सात दिनमें लाभ होगा। दवाके सेवनके समय दूध-भात खाये।
(26) शीघ्रपतन-
दो तुलसीदल और थोड़ा तुलसीबीज पानमें रखकर खाये।
(27) प्लेगकी दवा-
तुलसीबीज, काली मिर्च और मिस्रीको मिलाकर खाये।
(28)गर्भधारण हेतु-
स्त्री मासिक धर्मके समय तुलसीके बीजोंको चबाये।
(29) पित्तकी शान्तिके लिये-
तुलसीके पत्र, अदरक और नीबूके रसको मिलाकर सेवन करे।
(30) पाचनशक्तिकी वृद्धिके लिये-
तुलसीदलको पीसकर ताजे जलके साथ सेवन करे (भोजनोपरान्त)।
(31) गलेकी खराश-
तुलसीदल और अदरकका रस मधुमें मिलाकर चाटे।
(32) जुकाम-
तुलसीपत्र और मुलहठी पीसकर गुनगुने जलमें मिलाकर पीये।
(33) चोट लगनेपर-
तुलसीदल (सूखा) का चूर्ण तथा फिटकरीका चूर्ण मिलाकर चोट लगे स्थानपर रखे।
(34) जलना-
तुलसीपत्र-रसको नारियलके तेलमें मिलाकर लगाये।
(35) नाकके अंदर फुन्सी-
शुष्क तुलसी(tulsi) दल चूर्णको सूधिये।
(36) बाल झड़ना और असमय बालका सफेद होना-
तुलसी(tulsi) के सूखे पत्ते एवं आँवलेके चूर्णको पानीमें भिगोये। उस पानीसे सिर धोये।
(37) बच्चोंको पतला दस्त आना-
सूखे तुलसीदल और इसबगोलका दहीके साथ सेवन करे।
(38) अर्श–
तुलसीको जड़ और नीमके फलोंका चूर्ण छाछके साथ पीये।
(39) पेटका मरोड़-
शुष्क तुलसीपत्र, जीरा और काला नमक तीनोंको समान भागमें लेकर चूर्ण बनाये तथा दही या छाछके साथ सेवन करे।
(40) पुरुषत्वकी कमी-
तुलसीकी जड़ या बीजका चूर्ण लेकर गुड़में मिलाये तथा उसक गोदुग्धके साथ सेवन करे। इससे पुरुषत्व बढ़ता है। तुलसीकी जड़को टुकड़ा-टुकड़ा करे तथा चयावे। इससे भी पौरुष शक्ति बढ़ती है।
(41) जोड़ोंका दर्द-
तुलसी(tulsi) के रसका सेवन करे।
(42) गठिया–
तुलसीके पश्चाङ्ग (पत्ते, मञ्जरी, टहनी, बीज और जड़) का चूर्ण गुड़में मिलाये तह बकरीके दूधके साथ सेवन करे।
(43) नेत्र-ज्योति-वृद्धि-हेतु-
तुलसीदलका रव गुनगुने पानीमें डाले, उसमें फिटकरीका चूर्ण मिलाका पलकें सेंके।
(44) कानका बहना-
तुलसीदलका रस (गुनगुना) कानमें डाले।
(45) मस्तिष्ककी दुर्बलता –
प्रातःकाल तुलसी-दलका पानीके साथ सेवन करे। इससे मस्तिष्ककों कमजोरी दूर होती है एवं स्मरण शक्ति बढ़ती है।
तुलसी(tulsi )दल, बादाम तथा काली मिर्च-इन तीनोंको पीसकर मधुके साथ खाये। इससे दिमाग तेज होगा।
तुलसी(tulsi)दल तथा ब्राह्मी बूटी पीसकर छाने और मिली मिलाकर पीये। इससे स्मरण शक्ति बढ़ती है, दिमाग तेज होता है।
(46) संक्रामक रोग फैलनेपर-
तुलसी तथा नीमके पत्तोंका रस प्रातः सायं पीये। इससे संक्रामक रोगसे रक्षा होगी।
(47) मूर्च्छा-
तुलसीदलके रसमें नमक मिलाकर नाकमें एक-दो बूँद डाले। लाभ होगा।
इस तरह स्पष्ट है कि तुलसी प्राकृतिक वरदान है।
तुलसी(tulsi) द्वारा कुछ घरेलू उपचार

1. जो व्यक्ति प्रतिदिन तुलसीकी मात्र पाँच पत्तियोंका सेवन करता है, वह अनेकानेक बीमारियोंसे बच सकता है।
2. प्रातःकाल खाली पेट दो-तीन चम्मच तुलसीके रसका सेवन करनेसे शारीरिक बल एवं स्मरणशक्तिमें वृद्धिके साथ-साथ व्यक्तित्व भी प्रभावशाली होता है।
3. यदि तुलसीकी ग्यारह पत्तियोंका चार कालो मिर्चके साथ सेवन किया जाय तो मलेरिया एवं मियादी बुखार आदि ठीक किये जा सकते हैं।
4. तुलसी रक्तमें कोलेस्ट्रॉलकी मात्राको त्वरित नियन्त्रित करनेकी क्षमता रखती है।
5. शरीरके वजनको नियन्त्रित रखनेहेतु भी तुलसी अत्यन्त गुणकारी है। तुलसीके नियमित सेवन से भारी व्यक्तिका वजन घटता है एवं पतले व्यक्तिका वजन बढ़ता है। तुलसी शरीर का वजन आनुपातिक रूपसे नियन्त्रित करती है।
6. तुलसीके रसकी कुछ बूँदोंमें थोड़ा-सा नमक मिलाकर बेहोश व्यक्तिकी नाकमें डालनेसे उसे शीघ्र होश आ जाता है।
7. चाय बनाते समय कुछ पत्ती तुलसीकी साथमें उबाल ली जाय तो सर्दी, बुखार एवं मांसपेशियोंके दर्दमें अत्यन्त राहत मिलती है।
8. दस ग्राम तुलसीके रसको पाँच ग्राम शहदके साथ सेवन करनेसे हिचकी एवं अस्थमाके रोगीको ठीक किया जा सकता है।
9. तुलसीके काढ़ेमें थोड़ा-सा सेंधा नमक एवं पीसी सोंठ मिलाकर सेवन करनेसे क़ब्ज़ दूर होती है।
10. दोपहर भोजनके पश्चात् तुलसीकी पत्तियाँ चबानेसे पाचनशक्ति मजबूत होती है।
11. दस ग्राम तुलसीके रसके साथ पाँच ग्राम शहद एवं पाँच ग्राम पिसी काली मिर्चका सेवन करनेसे पाचनशक्तिकी कमजोरी समाप्त हो जाती है।
12. दूषित पानीमें तुलसीकी कुछ ताजी पत्तियाँ डालनेसे पानीका शुद्धीकरण किया जा सकता है।
13. प्रतिदिन सुबह पानीके साथ तुलसीकी पाँच पत्तियाँ निगलनेसे कई प्रकारकी संक्रामक बीमारियों एवं दिमागकी कमजोरीसे बचा जा सकता है और स्मरणशक्तिको मजबूत किया जा सकता है।
14. तुलसीके रसकी हल्की गरम बूँदें कानमें डालनेसे कानके दर्दसे मुक्ति पायी जा सकती है।
15. चार-पाँच भूनी हुई लौंगके साथ तुलसीकी पत्ती चूसनेसे सभी प्रकारकी खाँसियोंसे मुक्ति पायी जा सकती है।
16. तुलसीके रसमें खड़ी शक्कर मिलाकर पीनेसे सीनेके दर्द एवं खाँसीसे मुक्ति पायी जा सकती है।
17. तुलसी(tulsi)के रसको शरीरके चर्मरोगसे प्रभावित अङ्गोंपर मालिश करनेसे दाद, एग्जिमा एवं अन्य चर्मरोगोंसे मुक्ति पायी जा सकती है।
18. तुलसी(tulsi )की पत्तियोंको नीबूके साथ पीसकर पेस्ट बनाकर लगानेसे एग्जिमा एवं खुजलीके रोगोंसे मुक्ति पायी जा सकती है।
तुलसी(tulsi)की मुख्य विशेषता यह है कि यह पुरुषों, स्त्रियों एवं बच्चों सभीके लिये समान रूपसे प्रभावशाली है और इसका कोई अन्य दुष्प्रभाव भी नहीं होता।