Aarogya Anka

आयुर्वेद दुनिया का प्राचीनतम चिकित्सा प्रणाली है Ιऐसा माना जाता है की बाद मे विकसित हुई अन्य चिकित्सा पद्धतियों मे इसी से प्रेरणा ली गई है Ιकिसी भी बीमारी को जड़ से खत्म करने के खासियत के कारण आज अधिकांश लोग आयुर्वेद के तरफ जा रहे हैΙइस लेख मे हम आयुर्वेद चिकित्सा से जुड़ी हर एक रोग और उसके इलाज के बारे मे बताएंगे Ιआयुर्वेद चिकित्सा के साथ सभी प्रकार के जड़ी -बूटी के बारे मे तथा आयुर्वेद के 8 प्रकारों से हर तरह के रोगों के इलाज के बारे मे बताया गया हैΙ सभी पोस्टों को पढे ओर जानकारी अवश्य ले ताकि आप भी अपना जीवन आरोग्य के साथ healthy बना सके| thanks . 

परम पवित्र तुलसी के औषधीय उपयोग: uses of tulsi:

~तुलसी:tulsi:- तुलसी(tulsi) का पौधा परम पवित्र है। सहस्रों वर्षोंसे हिन्दू तुलसीकी उपासना करते आ रहे हैं। तुलसीको हम मन्दिरोंके सम्मुख तो लगाते ही हैं, घरोंमें भी तुलसीका रोपण कर अपनेको धन्य समझते हैं। तुलसीमें सभी देवोंका निवास है। तुलसीसे जल पवित्र हो जाता है। तुलसीको गन्ध विकारनाशक है। तुलसी (tulsi) का औषधीय महत्त्व भी है। … Read more

कुछ घरेलू औषधियाँ(गिलोय/अमृता,आँवला,तुलसी,हल्दी… इत्यादि) के महत्व एवं प्रयोग:

*दैनिक जीवन मे उपयोगी आयुर्वेदिक घरेलू औषधियाँ– आज सम्पूर्ण विश्व वनस्पतियोंसे निर्मित औषधियोंकी ओर आकर्षित हो रहा है; क्योंकि मनुष्यको यह आभास हो गया है कि कृत्रिम औषधियाँ जहाँ एक ओर रोगको शान्त करती हैं वहीं दूसरी ओर शरीरके अङ्ग प्रत्यङ्गमें घातक प्रभाव डालकर कालान्तरमें जीवनको नष्ट करनेवाले रोगोंको भी उत्पन्न कर देती हैं। जबकि … Read more

Sujok therapy: सूजोक चिकित्सा पद्धति: क्या है?

Sujok therapy(सूजोक चिकित्सा पद्धति) क्या है? ‘(Sujok therapy)सुजोक-चिकित्सा’ एक्यूप्रेशर(Acupressure)-एक्यूपंक्चर-चिकित्सा पद्धतिपर ही आधारित है। ‘सुजोक‘ कोरियन भाषाका शब्द है, कोरियाकी भाषामें ‘सु’ का अर्थ है हाथ और ‘जोक‘ का अर्थ है पैर। हमारे हाथ एवं पैरोंके अङ्गोंकी बनावटमें हमारे शरीरकी बनावटसे काफी समानता है| अतः हाथ तथा पैरके सूक्ष्म विन्दुओंका ज्ञान प्राप्त करके रोगोंकी चिकित्सा की जा … Read more

High blood pressure(उच्च रक्तचाप)- का आयुर्वेदिक उपचार

आयुर्वेद-चिकित्सा-प्रणालीमें ‘(high blood pressure )उच्च रक्तचाप’ नामका कोई रोग नहीं है-यह मानना सर्वथा भूल है। इसका वर्णन आयुर्वेदशास्त्रोंमें वातरोगोंके अन्तर्गत आता है। इसका आयुर्वेदिक नाम ‘शिरागत वात’ है। रक्तवाहिनियों तथा धमनियोंपर रक्तका अधिक दवाव पड़ना और उनका कठोर हो जाना ही ‘शिरागत वात’ है। शिरा और कोशिकाओंकी दीवारोंपर भी रक्तके अधिक दवावके कारण high blood pressure होता … Read more

Abhyarishta(अभ्यारिष्ट)Amritarishta(अमृतारिष्ट)बनाने की विधि,मात्रा व उपयोग

Abhyarishta(अभ्यारिष्ट)- बड़ी हरड़ का छिलका 5 सेर, मुनक्का 2½ सेर, महुआ के फूल और बायविडंग 40-40 तोला लेकर कूटने योग्य चीजों का जौकुट चूर्ण तैयार कर लें और इन ओषधियों को । मन 11 सेर 16 तोला जल में डालकर पकायें। (काढ़ा बनावें।) चौथाई जल शेष रहने पर शीतल करके छान लें। अब इसमें 8 … Read more

Aasva-Arishta(आसव-अरिष्ट प्रकरण) in hindi

द्रवेषु चिर कालस्थं द्रव्यं यत्सन्धितं भवेत। आसवारिष्ट भेदेस्तु प्रोच्यते भेषजो चितम् ।। अर्थात् जल, क्वाथ, स्वरस आदि पतले पदार्थों में गुड़, चीनी, मधु आदि घोलकर-छायाफूल, बबूल छाल, महुआ (मधूक-पुष्प) आदि मिलाकर सन्धान करके रखने पर उनमें जो वस्तु चिरकाली स्थायी (बहुत समय तक रखने पर भी नष्ट न होने वाली) उत्पन्न होती है-यह ओषधोपयोगी है … Read more

पित्ताशय की पथरी(gall bladder stone) के लक्षण एवं उपचार in hindi

पित्ताशय (gall bladder)- उदरके दायी ओर ऊपरकी तरफ स्थित नवीं पसलीके पास यकृत्के निचले भागसे लगा हुआ लगभग 4 इंच लम्बा गाजरके समान आकृतिका पित्ताशय होता है। इसका मुख्य कार्य यकृत्में बने पित्तके एक अंशको इकट्ठा करना है। इसमें लगभग 45 सी०सी० पित्त जमा रहता है। जब भोजन आमाशयसे आगे बढ़ता है तो पित्ताशयके विक्षोभसे … Read more

गोक्षुरादि गुग्गुल(gokshuradi guggul)और त्रिफला गुग्गुल(triphla guggul) बनाने की प्रकरण तथा उपयोग

सबसे पहले हम जानेंगे की गुग्गुल क्या होता है ओर गुग्गुल का प्रकरण क्या होता है- *गुग्गुल(guggul) प्रकरण* ~आयुर्वेदीय चिकित्सा जगत में “गुग्गुल” का अत्यन्त ही महत्वपूर्ण स्थान है। समस्त (80) प्रकार के वायु रोगों में इसका कुशल वैद्यजनों द्वारा सफलतापूर्वक प्रयोग किया जाता है, लेकिन इसके सेवन से पूर्ण रूपेण लाभ तभी सम्भव है … Read more

marichyadi vati(मरिच्यादि वटी) or makardhvaj vati (मकरध्वज वटी) के मात्रा व उपयोग

सबसे पहले हम जानते हाई गुटिका/वटी क्या होता है और इसको कैसे तैयार करते है- ~गुटिका या वटी- ओषधियों को कूट पीस कर व कपड़छान करके शहद, गुड़, खाण्ड, आदि की चाशनी में मिलाकर अथवा ओषधियों को पानी, स्वरस अथवा क्वाथ आदि में पीस कर अथवा पाक करके जो गोलियाँ बनायी जाती है, उनको ही … Read more

चंदनादि वटी(chandnadi vati) और चंद्रप्रभा वटी(chandraprabha vati) प्रकरण, एवं उपयोग in hindi

*गुटिका/वटी (gutika /vati)या capsules- ओषधियों को कूट पीस कर व कपड़छान करके शहद, गुड़, खाण्ड, आदि की चाशनी में मिलाकर अथवा ओषधियों को पानी, स्वरस अथवा क्वाथ आदि में पीस कर अथवा पाक करके जो गोलियाँ बनायी जाती है, उनको ही गुटिका/वटी (गोलियाँ) कहा जाता है। गालियों को हाथ से बनाने पर वे छोटी-बड़ी भी … Read more